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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

माँ पर कविता-माँ ही जननी,माँ ही पोषक


माँ ही जननी
माँ ही पोषक
माँ ही रक्षक
माँ पथ प्रदर्शक
माँ स्नेह सरिता है
माँ करूणा का सागर
माँ का आशीष
पारस मणी
माँ की गोद अनंत चैन
माँ के
समीप ह्रदय संतुष्ट
माँ का
वर्णन असंभव 
माँ तो केवल माँ है
ना हुआ उसके 
जैसा कभी
ना ही 
कोई होगा कभी
जिसने भी जान लिया
माँ का सत्य
उसका जीवन 
हो जाएगा तर
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
13-05-2012

519-39-05-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. माँ की दुआ से बढ़कर कोई दुआ नही
    माँ जैसा पवित्र रिश्ता कोई दूसरा नही,,,,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  2. माँ खुद में ही अनंत भाव लिए हुए हैं .....बहुत खूबसूरत भाव

    उत्तर देंहटाएं