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शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

दिल-ऐ-कातिल



देखा जो
चेहरा उनका करीब से
जान ली हकीकत
छुपी थी जो चमकते
चेहरे के पीछे
दिखा एक
दिल-ऐ-कातिल  मुझे
मासूमियत के पीछे
या तो हकीकत
भूल जाऊँ
उनसे दिल लगाता रहूँ
शौक-ऐ-मोहब्बत में
पेश कर दूं
दिल को
क़त्ल होने के लिए
या उन्हें भूल जाऊँ
बचा लूं जान
दिल के
क़त्ल होने से पहले
28-05-2012
535-55-05-12

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