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शनिवार, 21 जुलाई 2012

जिसे भी मनायें हम मनायें


जिसे भी मनायें हम मनायें
हमारे दुःख ना जाना कोई
किसे कहें तकलीफ हमारी
हमें सुनने वाला नहीं कोई
हमें तो आदत है सहने की
क्यों हमें दिलासा दे कोई
ना पहले दुआ का असर हुआ
ना अब आगे उम्मीद कोई
अब मुस्काराते हुए जीना है
अब और चारा भी नहीं कोई
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
30-05-2012
544-64-05-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी मायूसी ठीक नहीं | दुआओं में असर तो होगा ज़रा दिल से मांग के देखें | अच्छे भाव व्यक्त किये हैं |

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुस्कराते चहरे पर सबकी नजर टिक जाएगी जब
    कोई तो होगा ऐसा जो पूछ लेगा हाल तब
    :-)

    उत्तर देंहटाएं