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बुधवार, 25 जुलाई 2012

हर सुबह ऐसी ही होगी



सूरज ने 

अंगडाई ली
कोपलें हँसने लगी
ओस की बूँदें
चमकने लगी
मंद बयार चलने लगी
धूल उडाती गायें
चरने निकल पडी 
परिंदों ने मुनादी
कर दी
सुबह हो गयी
नयी नवेली दुल्हन ने
आँखें खोली
आधी नींद में
चुल्हा फूंकने लगी
क्या ज़िन्दगी भर
हर सुबह
ऐसी ही होगी  
विवाह के दूसरे दिन ही 
सोचने लगी 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-06-2012
552-72-05-12

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुहानी सुबह है..
    पर दुल्हन को चुला फूंकने में क्यों भिड़ा दिया सर जी..
    :-) :-) :-) :-)

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