ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 14 जुलाई 2012

आज कोई उनका लिखा नगमा सुना दे



आज कोई उनका लिखा

 नगमा सुना दे 
उनके करीब होने का
 अहसास करा दे 
ना करे फ़िक्र
सुर और साज़ की
ना ही लय ताल की
बस सुरीला नगमा सुना दे
उनकी कलम से निकले 
अल्फाजों से 
दिल को सुकून दे दे
एक एक लफ्ज़
दिल में बवंडर 
मचाएगा 
बीते वक़्त के 
समंदर में ले जाएगा
दिल मोहब्बत में 
फिर से डूब जाएगा 
अब वो नहीं इस जहाँ में
भूल जाएगा
जिस्म का एक एक रोम
मदहोश हो जाएगा
बहक कर नाचने लगेगा
खुद भी गाने लगेगा
वो नगमा 
जो उन्होंने लिखा था 
आज कोई उनका लिखा 
नगमा सुना दे

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
14-05-2012
522-42-05-12

2 टिप्‍पणियां: