ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

उजड़ गयी जब फसल सारी



उजड़ गयी
जब फसल सारी
तुम पूछते
खलिहान कहाँ है
बिखर चुका
जब परिवार सारा
तुम पूछते घर कहाँ है
खुद गए
रास्ते में गडडे
अब पूछते हो
रास्ता कहाँ हैं
कैसे बताऊँ
खुद ने ही मारी थी
कुल्हाड़ी
अपने पैरों पर
चढ़ाया था
सब को सर पर
समझाया था
कोई बड़ा नहीं
कोई छोटा नहीं
सब बराबर घर में

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-06-2012
556-76-05-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. उजड़ गयी
    जब फसल सारी................इस बार सूखे की मार पड़ी बड़ी भारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. aapne sahi likha hain barabari ke draze kii maar har rishte par bhari hi padti hain

    उत्तर देंहटाएं