ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

घर की खामोशी



घर की खामोशी
हर पल दिल को
चीरने लगी
आपस में कलह
साफ़
दिखने लगी
सुबह को ही शाम
होने लगी
एक दूसरे पर ऊंगली
उठने लगी
प्रेम पर नफरत
हावी होने लगी
अहम् की जीत
हो गयी
अहम् ने
सत्ता हाथ में ले ली
परिवार के बिखरने की
रिश्तों के टूटने की 
शुरुआत हो गयी
02-06-2012
554-74-05-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. अहम् ने
    सत्ता हाथ में ले ली
    परिवार के बिखरने की
    रिश्तों के टूटने की
    शुरुआत हो गयी,,,,,,,,,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut sundar itne lambe samay ke baad phir se blog ki vapsi ki hai maine aur wahi kadva sach dekhne ko mila .............yah aaj ka katu satye hai ......aapki rachnao ko me sach ka iina naam dena chahungi . hardik shubhkamnaye

    उत्तर देंहटाएं
  3. अहम् ने
    सत्ता हाथ में ले ली
    परिवार के बिखरने की
    रिश्तों के टूटने की
    शुरुआत हो गयी
    सार्थकता लिए सटीक अभिव्‍यक्ति ... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. निरंतर जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'निरंतर की कलम से' के कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 29 जुलाई को 'घर की खामोशी' शीर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद
    फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

    उत्तर देंहटाएं