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रविवार, 22 जुलाई 2012

बुढापा ऐसा ही होता है



पुराने पेड़ को देखा तो
किसी बूढ़े सा नज़र आया
मोटा तना उम्र बता रहा था
कम डालियाँ,कम पत्ते
समय की कहानी दर्शा रहे थे
ऐसा लगा बूढा शरीर
बिना वस्त्राभूषण मजबूरी में
जिए जा रहा हो
गौर से देखा
कोई घोंसला तो नहीं दिखा
दो तीन पक्षी अवश्य दिखे
जिन्होंने बसेरे तो किसी
पत्तियों से भरे पेड़ पर
बसा लिए
ऐसा प्रतीत हुआ
पुराने रिश्ते निभाने आये हैं
मैं समझ गया
पक्षियों को भी पता चल गया
अब पेड़ के  जाने का समय
आ गया है
जाते जाते मिलने की
रस्म पूरी करते रहो
थोड़ी बहत खुशी देते रहो
द्रश्य को देख कर
मुझे ध्यान आया
बुढापा ऐसा ही होता है
बहुत कम संगी साथी
शरीर बीमार,
अपनों की कमी
कभी कोई मिलने आ जाए
तो ह्रदय खुशी से भर जाए
नहीं तो अकेले ठूंठ से
खड़े रहो
समय काटते रहो
संसार से जाने का
इंतज़ार करते रहो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
30-05-2012
545-65-05-12

1 टिप्पणी:

  1. नहीं तो अकेले ठूंठ से
    खड़े रहो
    समय काटते रहो
    संसार से जाने का
    इंतज़ार करते रहो

    बचपन हर्षाता है ..

    बुढापा रूलाता है !!

    उत्तर देंहटाएं