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शनिवार, 21 जुलाई 2012

समय के साथ



समय के साथ
उम्र बढ़ती
सोच बदलता
रिश्ते बनते बिगड़ते
नए अनुभव
नए अहसास होते
अच्छे बुरे का पता
चलता
नहीं बदलती तो
फितरत नहीं बदलती
बढ़ती उम्र के साथ
अपनी फितरत भी
बदल दो
ज़िन्दगी को कुछ
अच्छे पल दे दो
अनुभव को सार्थक
 कर दो
30-05-2012
543-63-05-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. अनुभव को सार्थक कर दो..
    बहुत खूब|||
    बेहतरीन रचना:-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. नहीं बदलती तो
    फितरत नहीं बदलती
    बढ़ती उम्र के साथ
    अपनी फितरत भी
    बदल दो
    ज़िन्दगी को कुछ
    अच्छे पल दे दो
    अनुभव को सार्थक
    कर दो

    बहुत सुंदर ..

    उत्तर देंहटाएं