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गुरुवार, 19 जुलाई 2012

जब तक थे साथ हमारे



जब तक 

थे साथ हमारे
कदम नहीं 
बहकते थे उनके
हुए जब से जुदा हमसे
होश नहीं उनको
मदहोश भी इतने
सम्हाले नहीं सम्हलते
गरूर भी इतना
मुंह से नहीं कहेंगे
फिर साथ चाहिए
हमारा
उनकी शर्तों पे
हम आगे बढ़ कर
हाथ भी थाम ले
तो छुडायेंगे भी नहीं
पर कहेंगे ज़रूर
तुम्हें ही ज़रुरत
हमारी
हम तो पहले ही
खुश थे
28-05-2012
532-52-05-12

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