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रविवार, 8 जुलाई 2012

भ्रूण ह्त्या पर कविता-मुझे जन्म तो लेने दो


मुझे जन्म तो लेने दो

संसार को देखने तो दो
वैसे ही बहुत कुछ
सहना होगा
लपलपाती नज़रों से
खुद को बचाना होगा
पुरुषों का तिरिस्कार
सहना होगा
हवस का शिकार
होना पडेगा
माँ ,बेटी ,पत्नी का
पात्र निभाना होगा
चूल्हे ,चक्की की
भट्टी में पिसना होगा
खुद से पहले दूसरों को
खिलाना होगा
अपने हाथों से पाप
मत करो
जन्म से पहले
मुझे मत मारो
इश्वर को
क्या जवाब दोगे
ये भी ध्यान कर लो
मुझे जन्म तो लेने दो
मुझे जन्म तो लेने दो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
10-05-2012

509-24-05-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. काश ...उन हत्या की गई लड़कियों को भी जन्म लेने दिया गया होता ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. मैं ही वो सख्त जान हूं कि जिसके वास्ते
    तपती हुई चट्टान को बिस्तर कहा गया

    उत्तर देंहटाएं