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सोमवार, 2 जुलाई 2012

कैसे कहूँ कभी हम उनके थे



कैसे कहूँ
कभी हम उनके थे?
हम सफ़र 
हम निवाले थे
उनके प्यार में मदहोश थे
समझते थे
ताजिंदगी चिपके रहेंगे
उनके दिल से
होश में आये तब तक
वो मिला चुके थे 
दिल हमारे रकीब से
उतार दिया
हमें दिल से वैसे ही
जैसे नयी बिंदी 
लगाने के लिए
माथे से पुरानी 
बिंदी उतारते थे
कैसे कहूं हम कभी
उनके थे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
04-05-2012

497-12-05-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल के चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आकर चर्चामंच की शोभा बढायें

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह: बहुत सुन्दर प्रस्तुति..आभार..

    उत्तर देंहटाएं