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रविवार, 1 जुलाई 2012

तुम्हें याद करना.....ना तो मेरी आदत ना ही मजबूरी


तुम्हें याद करना
ना तो मेरी आदत
ना ही मजबूरी
वो जीने के लिए
आवश्यकता मेरी
ह्रदय को
धड़कने के लिए रक्त
साँस के लिए हवा
मन को
जीवित रखने के लिए
तुम्हें याद करना
सपनों में देखना
मेरे लिए आवश्यक है
ह्रदय धडक भी ले
साँस भी आ रही हो
अगर मन निर्जीव हो
तो मैं जीवित कैसे हो
सकता हूँ
फिर खुद को जीवित
रखने के लिए
अगर तुम्हें याद 
करता हूँ
सपने में देखता हूँ
तो क्या अनुचित 
करता हूँ
तुम्हें तो प्रसन्न होना
चाहिए
बिना साथ होते हुए भी
मेरे जीवन की कारक हो
बिना तुम्हारी यादों के
मेरा अस्तित्व ही
नहीं है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
04-05-2012

495-10-05-12

11 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 02-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-928 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. मेरे साथ होते हुए
    बिना भी
    मेरे जीवन की कारक हो
    बिना तुम्हारी यादों के
    मेरा अस्तित्व ही
    नहीं है ..... अनन्त में खोज करते भाव ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. तुम्हें याद करना.....ना तो मेरी आदत ना ही मजबूरी.....
    राजेन्द्र तेला जी, की पोस्ट पर,,,,,

    सपनो से दिल लगाने की आदत नही रही|
    हर वक्त अब मुस्कराने की आदत नही रही||
    यह सोच कर कि अब मनाने नही आयेगें|
    अब रूठ जाने कि मजबूरी,आदत नही रही||

    उत्तर देंहटाएं