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शुक्रवार, 29 जून 2012

सृजन और विध्वंस

मिट्टी का भाग्य 
अच्छी या खराब
निर्भर करेगा उस पर
जिसके के हाथों में
मिट्टी जायेगी 
जिसकी जैसी नियत
वो वैसा ही करेगा 
एक बनाएगा 
भगवान् की मूरत
मंदिर में सजाएगा
खूब नाचेगा गायेगा
आनंद मनायेगा
दूसरा मूरत को
मिट्टी में मिलाएगा
फिर धूल उडाएगा 
अहम् भरा
अट्टाहास करेगा
भूल जाता है 
एक दिन खुद भी
मिट्टी में मिल जाएगा
एक सृजन में 
दूसरा विध्वंस में
विश्वास रखता 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-05-2012


                    492-07-05-12

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