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बुधवार, 6 जून 2012

जब मेरी याद आये


जब मेरी याद आये
मुझे ख़त लिखना
ख़त में चाहे 
एक लफ्ज़ ना लिखना
पर उस पर मेरा पता
अपने हाथ से लिखना
तुम्हारी हाथों की लिखावट
देख कर ही खुश हो लूंगा
अब भी तुम्हारे पास
कुछ लम्हे बचे हैं मेरे लिए
जान कर सुकून से
जीता रहूँगा
दूर रहते हुए भी
तुम्हें अपने दिल के
करीब पाऊंगा
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-04-2012
437-18-04-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. .... प्रशंसनीय रचना - बधाई
    नई पोस्ट सदा की अर्पिता पर आपका स्वगत है

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह ...बहुत ही बढि़या।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ek sachhe premi ke antarman ki vyatha. bahut hi badhiya

    -------------
    mere blog pe bhi aayega
    तरकश

    उत्तर देंहटाएं