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मंगलवार, 5 जून 2012

हास्य कविता- कितना खुशगवार था वो लम्हा


हास्य कविता- कितना खुशगवार था वो लम्हा
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कितना खुशगवार था
वो लम्हा
जब उसने मुस्करा कर
मेरी तरफ देखा 
करीब आकर मेरा पता पूछा
दिल खुश हुआ
जब रंग बिरंगे कागज़ में
लिपटा एक तोहफा
हाथ में थमाया
दिल टूट कर बिखर गया
जब उसने
चहकते हुए कहा
आपके पड़ोस में रहने वाले
मेरे मंगेतर को भिजवा देना

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-04-2012
436-16-04-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. हास्यास्पद रचना...
    बहुत खूब....

    उत्तर देंहटाएं
  2. सबकी अपनी अपनी पसंद होती है .. अपना अपना दिल होता है ..

    उत्तर देंहटाएं