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शनिवार, 30 जून 2012

व्यंग्य-हमने मुस्कराकर बात क्या कर ली



हमने मुस्कराकर 
बात क्या कर ली  
उन्हें लगा हम उनसे
प्यार जता रहे हैं
नाराज़ हो कर
कहने लगे
अपनी उम्र देखिये
ना जान ना पहचान
मीठी बातें क्यूं कर रहे हैं ?
हमने जवाब दिया
हमें पता नहीं था
अपनों से छोटों से
मीठी बात नहीं
करनी चाहिए
मानता हूँ
भेड की खाल में
भेड़िये भी होते हैं
फिर भी एक सलाह
आपको भी देते हैं
अपना सोच बदलिए
उम्र में
छोटा हो या बड़ा
हर मुस्काराकर
मीठी बात करने वाले को
आशिक नहीं समझना
चाहिए
कभी उसमें
पिता और भाई भी
ढूंढना चाहिए
02-05-2012
493-08-05-12

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