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बुधवार, 20 जून 2012

खूबसूरत आवरण



किताबों की दूकान में घुसते ही
शो केस में लगी रंग बिरंगे
खूबसूरत आवरण वाली
किताब पर नज़रें अटक गयी
जब आवरण इतना खूबसूरत
किताब भी बहुत सुन्दर होगी
कई दिनों बाद
अच्छा साहित्य पढने की
इच्छा पूरी होगी
शो केस के पास जाकर देखा 
नाम चीन लेखक द्वारा लिखी हुयी थी
कीमत भी बहुत अधिक थी
दूकान के मालिक से पूछा
किताब कैसी है
कहने लगा खूब बिक रही है
किताब की कीमत चुकाई
सब काम छोड़ घर पहुँचते ही
पढ़ना प्रारम्भ किया
कुछ फ्रष्ठ पढने के बाद भी
समझ नहीं आया लेखक
क्या कहना चाह रहा  है
अंत में थक हार कर
किताब को उठा कर रख दिया
सर में दर्द होने लगा था
तभी एक बुजुर्ग मित्र का
घर आना हुआ
मुझे सर पकडे देख
कारण पूछा
सब सुनने के बाद कहने लगे
सुन्दर आवरण में लिपटी
हर वस्तु वास्तव में सुन्दर हो
यह आवश्यक नहीं
नाम चीन व्यक्ति का 
हर कार्य प्रेरणास्पद नहीं होता
रही बिकने की की बात
तो ध्यान रखना
हर अधिक बिकने वाली चीज़
गुणवत्ता में सर्वोत्तम नहीं होती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
19-04-2012
463-44-04-12

7 टिप्‍पणियां:

  1. हर अधिक
    बिकने वाली चीज़
    गुणवत्ता में सर्वोत्तम
    नहीं होती,,,,

    मन के भावों का सुंदर संम्प्रेषण,,,,

    MY RECENT POST:...काव्यान्जलि ...: यह स्वर्ण पंछी था कभी...

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह: क्या बात कह्डाली.... राजेन्द्र जी.
    हर अधिक
    बिकने वाली चीज़
    गुणवत्ता में सर्वोत्तम
    नहीं होती....बहुत सुन्दर..

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर रचना!
    इसको साझा करने के लिए आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  4. SUNDER AAWRAN ME LIPTI HAR VASTU VASTAW ME SUNDER NHI HOTI.BHAWPOORA UTKRIST RACHNA.

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर आवरण में लिपटी
    हर वस्तु वास्तव में
    सुन्दर हो
    यह आवश्यक नहीं
    नाम चीन व्यक्ति का
    हर कार्य
    प्रेरणास्पद नहीं होता
    रही बिकने की की बात
    तो ध्यान रखना
    हर अधिक
    बिकने वाली चीज़
    गुणवत्ता में सर्वोत्तम
    नहीं होती
    वाह !!! क्या बात है बहुत सही ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी पोस्ट कल 21/6/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 917 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  7. मन के भावों का सुंदर संम्प्रेषण,,,,

    उत्तर देंहटाएं