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मंगलवार, 5 जून 2012

हंसने से पहले ही....


हँसने से पहले ही
रोना पड़ता
सर पर रखा हाथ ही
गला दबाने लगता
ठीक होने से पहले
चारागर ही ज़ख्म
फिर हरे कर देता
ज़िन्दगी में अब तक
कोई चारागर ना मिला
जो ज़ख्मों को ठीक कर दे
फिर भी हारा नहीं हूँ
तलाश करता रहूँगा
वक़्त काटता रहूँगा
12-04-2012
435-15-04-12
चारागर =चिकत्सक

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