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बुधवार, 27 जून 2012

जी का वन ही तो जीवन है



जीवन के
सृजन कर्ता से
पूछा मैंने एक दिन
क्यों आपने संसार में
सांस लेने वालों का नाम
जीव रखा
वो मुस्कारा कर बोला
जी का वन ही तो जीवन है
जिसमें सुन्दर पेड़ हैं तो
कंटीली झाड़ियाँ भी
इंसान हैं तो
हिंसक जानवर भी
कल कल करते झरने हैं तो
गंदे पानी से भरे गड्डे भी
नर्म घास के मैदान हैं तो
पथरीले रास्ते भी
मारने वाले हैं तो
बचाने वाले भी
क्या नहीं है
जी के इस वन में
यह सोच मैंने
सांस लेने वालों का
नाम जीव
सांस जब तक चले
तब तक जीवन के
नाम से
संबोधित किया

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
28-04-2012
481-62-04-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. कितना सुन्दर दर्शन प्रस्तुत किया है आपने.., बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति.

    शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं