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मंगलवार, 19 जून 2012

जाते जाते भी रह जाती हैं कुछ ख्वाहिशें…..




शांत ज़िन्दगी में
तूफ़ान मचाती हैं
ख्वाहिशें
सोते से उठाती हैं
ख्वाहिशें
हँसते को रुलाती हैं
ख्वाहिशें
मन का चैन छीनती हैं
ख्वाहिशें
ज़िन्दगी भर पूरी
होती नहीं हैं
ख्वाहिशें
जाते जाते भी
रह जाती हैं कुछ
ख्वाहिशें…..
19-04-2012
461-42-04-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक पूरी हो तो
    दूसरी जन्म लेती है
    ख्वाहिशें...

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही बेहतरीन रचना
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  3. जाते जाते भी
    रह जाती हैं कुछ
    ख्वाहिशें….....

    kyunki khwahishen kabhi poori nahin hotin...!

    उत्तर देंहटाएं
  4. मनोभाव का सुंदर सम्प्रेषण,,,,

    राजेंद्र जी,,,आपका समर्थक बन गया हूँ,
    अगर आप भी बने तो मुझे खुशी होगी,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

    उत्तर देंहटाएं