ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 8 जून 2012

मैंने चाँद से पूछा,आकाश कितना बड़ा है



मैंने चाँद से पूछा
आकाश कितना बड़ा है
चाँद बोला पता नहीं
मैंने भी सूरज से पूछा था
उसने भी यही कहा
मुझे पता नहीं
नन्ही चिड़िया ने
वार्तालाप सुना
धीरे से बोली
मेरी भी सुन लो
मैं जीवन भर उडती रहूँ
तो भी पता नहीं चलेगा
आकाश कितना बड़ा है
इतना अवश्य पता है
जितना मेरे लिए आवश्यक
उससे तो बड़ा है
फिर क्यों जानने के लिए
खुद को परेशान करूँ
हर छोटी बड़ी बात की
चिंता करूँ
क्यों नहीं
जितना आवश्यक केवल
उसका ध्यान करूँ
कह कर चिड़िया
आकाश की ओर उड़ गयी
मुझे सोचने के लिए
बहुत कुछ दे गयी
कॉपीराइट@

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
16-04-2012
440-21-04-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. रोज ही उसमें दौड़ता रहता है चाँद..

    उत्तर देंहटाएं
  2. उम्मीद और विश्वास से बड़ा कोई आकाश नहीं हैं ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. जितने की ज़रूरत है उतना लब्ध है तो फिर चिंता कैसी!
    सुंदर अभिव्यक्ति!

    उत्तर देंहटाएं