ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 7 जून 2012

सच मान बैठे




उसने 
वादा किया था
कल  फिर आऊँगी
कई दिन
कई रातें गुजर गयी
आँखों की नींद अधूरी रही
दिल की
धड़कन बढ़ती गयी
निगाहें रास्ते पर गढ़ी रहीं
जब थक कर पूंछा
मैंने किसी से
कहीं देखा है तुमने उसको
हंस कर वो कहने लगा
कभी मुझ से भी
वादा कर के गयी थी
मुझ से भी बेवफायी
करी थी
फर्क इतना ही है
मैंने यकीन नहीं किया
तुम सच मान बैठे 
उसके वादे को
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-04-2012
438-19-04-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. kya baat hai,, sach me har waade ko sach nahi maan lena chahiye.. bahut hi badiya lekhan

    aaiyega mere blog pe bhi आज भारत बंद है

    उत्तर देंहटाएं
  2. वादों और विवादों से सजी दुनिया..

    उत्तर देंहटाएं
  3. फर्क इतना ही है
    मैंने यकीन नहीं किया
    तुम सच मान बैठे उसके
    वादे को
    हमेशा की तरफ उत्‍कृष्‍ट लेखन ...आभार ।

    उत्तर देंहटाएं