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बुधवार, 6 जून 2012

भुगत रहा हूँ खामियाजा आज


बढ़ गया 
दिल का रंज-ओ-गम
जीना हो गया 
मुश्किल आज
जिसने खोला था 
दरवाज़ा जहन का
उसी ने लगा दिया 
ताला आज
रूबरू कराया था 
रोशनी से जिसने
उसी ने दिखाया 
अन्धेरा आज
शिकवा शिकायत नहीं 
उससे फिर भी
कुछ पल तो 
निभाया था 
उसने साथ
कसूर उसका 
फिर भी  नहीं 
मानता
मैंने ही किया होगा
 कुछ काम ऐसा
भुगत रहा हूँ 
खामियाजा आज
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-04-2012
437-17-04-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. यही सच्चा स्नेह है.. कोई जब दूर हो जाता है, फिर भी हम उनकी दुहाई ही देते हैं.. कामना करता हूँ कि ये खामियाज़ा बस चंद लम्हों के लिए ही हो..

    उत्तर देंहटाएं

  2. दिनांक 06/01/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    “दर्द की तुकबंदी...हलचल का रविवार विशेषांक....रचनाकार...रविकर जी”

    उत्तर देंहटाएं
  3. शिकवे शिकायत दूर हो...
    भावपूर्ण रचना....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बस समझा लीजिये मन को जैसे भी ....सुन्दर लिखा है ..

    उत्तर देंहटाएं