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मंगलवार, 5 जून 2012

अँधेरे में भी रोशनी निरंतर मेरे साथ रहती है


अँधेरे में भी रोशनी  निरंतर मेरे साथ रहती है
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 आज भी दिन भर
दिमाग में
कोई ना कोई उधेड़बुन
चलती रही
खुद से सवाल किया
क्या ज़िन्दगी
ऐसे ही चलती रहेगी ?
मन की आस फिर भी
टूटी नहीं
बिस्तर पर लेटते ही
आँखें बंद हो गयी 
जिनकी हर इच्छा पूरी
हो जाती
नींद की तलाश में
ज़िन्दगी भर भटकते रहते
अधिक पाने की इच्छा में
सो ना पाते
यही क्या कम बात है ?
मुझे इतनी आसानी से
नींद आ जाती
अँधेरे में भी रोशनी 
निरंतर मेरे साथ रहती है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-04-2012
434-14-04-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ तो रात भर टिमटिमाती रही।

    उत्तर देंहटाएं
  2. यही क्या कम बात है ?
    मुझे इतनी आसानी से
    नींद आ जाती
    अँधेरे में भी रोशनी
    निरंतर मेरे साथ रहती....sahi kaha aap ne,ye soch hi sda bni rhe

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये रोशनी सदा यूँ ही प्रज्ज्वलित रहे...
    सभी के जीवन में......
    बेहतरीन रचना...

    उत्तर देंहटाएं