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मंगलवार, 8 मई 2012

हास्य कविता-हमने पूंछा उनसे ,हम कैसा लिखते


हमने पूंछा उनसे
हम कैसा लिखते हैं
जो भी लिखते हैं
क्या ठीक लिखते हैं
वो कहने लगे
आप जो भी लिखते हो
अच्छा लिखते हो
गलती कैसे निकालें
आप हमें अच्छे जो
लगते हो
हम घबरा गए
फ़ौरन कह दिया
आप सही बात बताना
नहीं चाहते
इसलिए ऐसा कहते हो
वो तुनक कर बोले
क्यों खामखाँ हम पर
तोहमत लगाते हो
हम आपको बताना
चाहते हैं
आपने जो अभी लिखा
वो हमें ठीक नहीं लगा
हमने कहा
यही तो हमने आपसे
पहले भी पूछा था
क्या अब आपने हमें
चाहना छोड़ दिया?
वो नाराज़ हो गए
बिदक कर बोले
हमारे सच बोलने से
पहले ही कई लोग
नाराज़ हैं
हम आपको नाराज़
नहीं करना चाहते थे
इस लिए सच नहीं
बोल रहे थे
सच बोलो तो भी
मुश्किल
नहीं बोलो तो भी
मुश्किल
हमने कहा परेशान
मत होइए
हम भी तो आपको
खुश करने के लिए ही
पूछ रहे थे
13-03-2012
363-97-03-12

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