ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 31 मई 2012

ये कैसी चाहत है ?



तुम कहते हो
हमें बहुत चाहते हो
हर पल याद करते हो
ये कैसी चाहत है ?
हमारे चेहरे पर
 दर्द की लकीरें
तुम ठहाके लगा 
रहे हो
हम चल भी नहीं 
सकते
तुम दौड़ लगाते हो
क्यों खामखाँ
दोस्ती का नाम
 बदनाम करते हो
इससे तो बेहतर था
तुम खुले आम हमें
दुश्मन कहते
दिल में झूठ बोलने का
बोझ तो नहीं ढोते
अपने ज़मीर से तो
इमानदारी करते


डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
02-04-2012
424-04-04-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब...............

    हम चल भी नहीं
    सकते
    तुम दौड़ लगाते हो
    क्यों खामखाँ
    दोस्ती का नाम
    बदनाम करते हो

    उत्तर देंहटाएं