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रविवार, 6 मई 2012

पतझड़ में फिर ठूठ सा दिखूंगा तब भी मेरी तरफ देखना ना भूलना

कई बार उस
सड़क से निकला 
कचनार का वृक्ष 
कभी नहीं दिखा 
अब जब सुन्दर 
फूलों से लद गया
हर दृष्टि को 
आकृष्ट करने लगा 
स्व्यं को रोक नहीं पाया
मित्र को मनोइच्छा से 
अवगत कराया
कचनार के साथ चित्र 
लेने का आग्रह किया
बात सुन कर 
कचनार धीरे से बोला
पतझड़ में जब ठूठ 
बन कर रह गया था 
कोई नहीं झांकता था 
आज जब फूलों से
लद गया हूँ
तुम मेरे साथ 
अपना चित्र चाहते हो
ध्यान रखना
इंसान हो 
इंसान बन कर रहना
अगले वर्ष पतझड़ में
फिर ठूठ सा दिखूंगा
तब दुःख में साथ 
देना ना भूलना 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
13-03-2012
356-90-03-12
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दुःख,सुख,जीवन,जीवन मन्त्र .कचनार,वृक्ष,पतझड़ 

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