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शनिवार, 19 मई 2012

एक अजीब सा रिश्ता मेरा दर्द से


एक अजीब सा 
रिश्ता मेरा दर्द से
खुशी का एक पल भी 
सुहाता नहीं उसे
खुशी की आहट भर से ही 
भेष बदल बदल कर 
आ जाता है 
कभी चोट,कभी बीमारी
अपनों की नाराजगी
कभी दुनियादारी में 
तकलीफ बन कर 
आ धमकता
हँसने के लिए 
मुंह खोला नहीं
तुरंत अपनापन 
जताता है 
बहुत मोहब्बत है 
दर्द को मुझसे
कमबख्त 
पीछा ही नहीं छोड़ता
अब सहने की 
आदत हो गयी है 
उससे दोस्ती हो गयी 
बिना उसके 
अब मन भी नहीं लगता
एक अजीब सा रिश्ता 
मेरा दर्द से
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

18-03-2012
397-131-03-12

6 टिप्‍पणियां:

  1. दर्द को अपना मानिये, बेगानापन कम हो जायेगा

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  2. बिल्‍कुल सही कहा आपने .. बड़ा नजदीक का रिश्‍ता है दर्द से जिंदगी का ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  4. "दर्द की दवा ही दर्द है ! जिसने दर्द में जी लिया ओ जिंदगी को जीत लिया................!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. "दर्द की दवा ही दर्द है ! जिसने दर्द में जी लिया ओ जिंदगी को जीत लिया................!!

    उत्तर देंहटाएं