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रविवार, 20 मई 2012

यह कैसी परीक्षा है ?


यह कैसी परीक्षा है
जिस में शिष्य
परीक्षक
गुरु परीक्षार्थी है
अनुभव की प्रतिष्ठा
दांव पर है
जिसने सिखाया वो
अब गौण
जिसने सीखा वो
महान है
समय की यह कैसी
चाल है
बाप बेटा बराबर हैं
उम्र में अंतर व्यर्थ है
बड़ों को सम्मान
दूर की बात
स्वार्थ सर्वोच्च है
मैं और मेरा
सब से 
महत्त्वपूर्ण है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-03-2012
401-135-03-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. बड़ों के स्नेह और आशीष के बिना सारा ज्ञान अधूरा है, वैसे ही जैसे कि सोने की कुल्हाड़ी से जंगल में टहनियां काटना...और 'जो' इस 'मैं' और स्वार्थ के जाल से परे बड़ों का सम्मान करते हैं, असल परीक्षा में वाही उत्तीर्ण होते हैं..
    सुन्दर सार्थक अभिव्यक्ति है.
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. उत्कृष्ट मुखर अभिव्यक्ति समीचीन रचना ....शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बाप बेटा बराबर हैं
    उम्र में अंतर व्यर्थ है
    बड़ों को सम्मान
    दूर की बात
    स्वार्थ सर्वोच्च है
    “मैं” और मेरा
    सब से
    महत्त्वपूर्ण है


    वर्तमान दशा का सटीक आकलन....
    सार्थक रचना....बधाई...

    उत्तर देंहटाएं