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मंगलवार, 15 मई 2012

मेरा नसीब कहता है

मेरे हाथों की लकीरों में
हर तरफ
तेरा नाम लिखा है
फिर तूँ मेरे साथ
क्यूं नहीं है
या तो लकीरों का
इम्तहान ले रही है
या फिर खुद के हाथ से
 मेरा नाम मिटा रही है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-03-2012
389-123-03-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आखिर असली जरुरतमंद कौन है
    भगवन जो खा नही सकते या वो जिनके पास खाने को नही है
    एक नज़र हमारे ब्लॉग पर भी
    http://blondmedia.blogspot.in/2012/05/blog-post_16.html

    उत्तर देंहटाएं
  3. कुछ नई लकीरे ..मेरी किस्मत से जुडती जा रही हैं .....

    उत्तर देंहटाएं