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बुधवार, 2 मई 2012

परिस्थितियों के अनुसार


ना सूरज का
पूरब से निकलना
बदलता
ना पश्चिम में ढलना
बदलता
बदलना पड़ता तो
मनुष्य को बदलना पड़ता
परिस्थितियों के अनुसार
ढलना पड़ता
समय के सामने झुकना
पड़ता
जो समझ गया इस
बात को
उसका जीवन सरल
हो जाता
जो नहीं समझता
निरंतर हठ करता रहता
अहम् अहंकार को नहीं
छोड़ता
अपनी जिद पर अड़ा
रहता
जीवन भर ना सफल होता
ना चैन पाता
अंत तक व्यथित रहता
11-03-2012
348-81-03-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. उफ़ ..क्या लिख देते हैं आप डॉ ....आपकी बाते कभी कभी मुझ पर सटीक बैठती हैं ......

    उत्तर देंहटाएं
  2. अद्भुत रचना है आपकी..बधाई स्वीकारें

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं