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शनिवार, 19 मई 2012

ख्वाब मेरे सूरत उनकी थी

ख्वाब मेरे
सूरत उनकी थी
रोम रोम में आग
लगाते हुए
मदहोश करती हुयी
शोख अदाएं थी
तीर चलाते हुए
दिलकश निगाहें  थी
गले में
हार पहनाती
बाहें थी
होठों पर होठों की
नमी थी
दिल में मोहब्बत की
आंधियां उड़ रही थीं
अफ़सोस की सिर्फ
अहसास की रात थी
थोड़ी देर में
सुबह होने को थी
सब बातें  ख़्वाब
की बातें थी
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
18-03-2012
399-133-03-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. सब बातें ख़्वाब
    की बातें थी...
    Description poora poora real lag raha hai waise :) Sundar!
    Saadar,
    Madhuresh

    उत्तर देंहटाएं