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बुधवार, 23 मई 2012

मन की पीड़ा अब सही ना जाए



http://joshidaniel.com/2012/03/19/180/
मुख पर खुशी नहीं
आँखों में चमक नहीं
ना हँसा जाए ना रोया जाया 
मन की पीड़ा अब सही ना जाए 
पल पल मृत्यु का भ्रम कराये
क्यों हो रहा है सब ?
कब होगा अंत इसका?
ऐसा क्या किया मैंने ?
किस भूल का
दंड मिल रहा मुझको?
प्रश्न मन को बार बार सताए
ना नींद आये ना चैन आये
मन की पीड़ा सही ना जाए
ऐसा तो
कोई पाप नहीं किया मैंने
जो जीते जी मुझे नर्क दिखाए 
पता नहीं था
जीवन इतना दुर्गम होता 
हर कदम काँटों से भरा होता
कभी तो पथ सहज मिलेगा
कदम खुशी से आगे बढेगा 
बस यही प्रार्थना इश्वर से
करता हूँ
निरंतर धैर्य और आशा से
जीता हूँ

18-03-2012
407-141-03-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. ना हँसा जाए ना रोया जाया
    मन की पीड़ा अब सही ना जाए ..
    बहुत सुंदर रचना .....
    कभी समय मिले तो ...
    shiva12877.blogspot.in पर भी पधारें

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