ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 31 मई 2012

नसीब की क़यामत


नसीब  की
क़यामत तो देखिये
हाथों की मेहंदी को
अश्कों ने धो दिया
चूड़ियों की खनक को
सिसकियों ने दबा दिया
अरमानों ने
कफ़न ओढ़ लिया
लाल चुनडी की जगह
सफ़ेद साड़ी नी ले ली
ना जाने खुदा ने
उससे किस गुनाह का
बदला लिया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
   02-04-2012
422-02-04-12

1 टिप्पणी: