ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 20 मई 2012

अब लोग रोने भी नहीं देते


लोग अब 
रोने भी नहीं देते
आंसूओं को खून के
घूँट सा पीने को कहते
डरते हैं
कहीं ज़माने ने बहते
आंसूओं को देख लिया
देखने वाले सवाल पूछेंगे
कहीं मुंह से उनका नाम
निकल गया
उन्हें जान लेंगे
घबरा कर ग़मों को
चुपचाप सहने के लिए
कहते  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-03-2012
400-134-03-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक तो लोग रोने नहीं देते
    खुद का होने भी नहीं देते
    दे जाते हैं जिंदगी भर की यादे
    और यादों में जीने नहीं देते ||...अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. Rone Se Nahi Hasil Kuch Ae Dil-E-Sodai
    Ankhon Ki Bi Barbadi Daman Ki Bi Ruswai
    Hum Log Samandar Ke Bichre Hue Sahil Hai
    Is Paar Bi Tanhai Us Paar Bi Tanhai

    उत्तर देंहटाएं
  3. भीतरी कसमसाहट को सटीक शब्द देकर आपने अनेक दिलों की बात अपने लफ़्ज़ों से बयां कर दी...........वाह !

    उत्तर देंहटाएं