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गुरुवार, 17 मई 2012

जो बनते हैं सहारा लोगों के

जो बनते सहारा लोगों के
देते हिम्मत होंसला उनको
रोते से हंसाते उनको
बांटते मुस्कान ज़माने को
उन्हें खुद का ख्याल नहीं होता
अकेले  अँधेरे कमरे में रोते हैं
चुपचाप सहते हैं
कैसे समझाए उन्हें कोई
अँधेरे से निकल कर
उजाले में आ जाओ
कुछ अपना भी ख्याल करो
चाहने वालों को मायूस
ना करो
जिन्हें हंसाया था बड़ी
मुश्किल से
उन्हें फिर से ना रुलाओ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
17-03-2012
391-125-03-12
E

3 टिप्‍पणियां:

  1. जो धरती साधे हैं, उन्हें बाधा न पहुँचायी जाये।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

    करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच |

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन भाव संयोजन ।

    उत्तर देंहटाएं