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मंगलवार, 15 मई 2012

अपनी महफ़िल से मत निकालो मुझे

अपनी महफ़िल से
मत निकालो मुझे
बड़ी मुश्किल से
सहारा मिला था मुझे
अरसे बाद हँसना हुआ था
चैन की नींद सोया था
क्यों रातों में फिर से
जगाना चाहते
हँसते हुए को रुलाना
चाहते
खानाबदोशों सा
जिलाना चाहते
ना चाहो तो
मोहब्बत ना करो हमसे
दिल पर पत्थर रख लो
अपनी महफ़िल में
रहने दो मुझे
अपनी महफ़िल से
मत निकालों मुझे
16-03-2012
386-120-03-12

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