ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 11 मई 2012

जीवन तलाशता है खुद को


जीवन
तलाशता है खुद को
दिखता है
जैसा देखो उस को
नहीं पहचान पाया
कोई थाह उसकी
नहीं जान पाया
कोई आज तक उसको
जीवन तो जीवन है
जिसने
जैसा भी भुगता
वैसा ही समझा उस को

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
14-03-2012
370-104-03-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर ..राजेन्द्र जी..

    उत्तर देंहटाएं
  2. जीवन तो जीवन है
    जिसने
    जैसा भी भुगता
    वैसा ही
    समझा उस को,,,,,,सुंदर भाव

    MY RECENT POST.....काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    --
    डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"
    टनकपुर रोड, खटीमा,
    ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड, भारत - 262308.
    Phone/Fax: 05943-250207,
    Mobiles: 09456383898, 09808136060,
    09368499921, 09997996437, 07417619828
    Website - http://uchcharan.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं