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गुरुवार, 10 मई 2012

जीवन को नीरस ना बनाओ

जीवन को
नीरस ना बनाओ
नीरस जीवन
वैसा ही होता
जैसे मुस्कान बिना होंठ
रौशनी बिना नयन
स्नेह बिना हृदय
हरीतिमा बिना पृथ्वी
पंछी बिना गगन
वात्सल्य बिना माँ
चाँद तारों बिना रात
भावनाओं बिना इंसान
स्पंदन बिना शरीर
जीवन को नीरस
ना बनाओ
जल की बहती धारा
सा बनाओ
निरंतर चलता रहे
हर स्थिती परिस्थिती में
आगे बढ़ता रहे
उस में रस डालो
होठों की मुस्कान से
प्यार के भण्डार से
आनंद उत्साह से
छोड़ दो भूत काल की बातें
ना करो चिंता भविष्य की
जीवन को सजाओ
झरनों की कल कल से
पक्षियों की चचहाहट से
बसंत की बहार से
संगीत के सुर से
आमोद प्रमोद से
प्रेम भाई चारे से
खूब हँसो और हँसाओ
नाचो और नचाओ
जीओ और जिलाओ
जीवन को
नीरस ना बनाओ
जब तक जीओ
आनंद मनाओ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
14-03-2012
367-101-03-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. wah kya shandar hasmukh jeevan jine ki prerna deti hai ye kavita

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल 012/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं