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सोमवार, 7 मई 2012

अहसास-ऐ-सुकून


बीते दिनों की यादें
बहती हवा सी लगती
ज़हन को छूते ही
इक सिहरन सी होती
दिल करता है
थोड़ी देर तो ठहर जाए
ठन्डे हुए दिल को
फिर गर्माहट से भर दे
कुछ वक़्त के लिए
ही सही
अहसास-ऐ-सुकून
दे दे
13-03-2012
358-92-03-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. bahut waqt ke baad aapki koi kavita ''निरंतर '' shabd ke padh rahi hun


    खूब सूरत एहसास ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपनी इस सुन्दर रचना की चर्चा मंगलवार ८/५/१२/ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर देखिये आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह क्या बात है!! आपने बहुत उम्दा लिखा है...बधाई
    इसे भी देखने की जेहमत उठाएं शायद पसन्द आये-
    फिर सर तलाशते हैं वो

    उत्तर देंहटाएं