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मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

कहने को छोटी सी चिड़िया थी

एक एक
तिनका जोड़ कर
अथाह परिश्रम से
नीड बनाया था 
बसने से पहले ही
हवा के तेज झोंके ने
बेसहारा कर दिया 
समझ ना पायी
कैसे क्षण भर में
घर से बेघर हो गयी 
न आँसू बहाए
न व्यथित हुयी
न ढिंढोरा पीटा
दुनिया में 
तन मन,संयम से
चुपचाप जुट गयी
तिनका तिनका जोड़ कर 
नया नीड बनाने में  
कहने को
छोटी सी चिड़िया थी
हिम्मत दिखायी 
पहाड़ों सी
अकेली लडती रही 
तूफानों से
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
05-03-2012
299-33-03-१२
हिम्मत,लगन,होंसला,जीवन

5 टिप्‍पणियां:

  1. यही जुझारूपन देखना अच्छा लगता है..

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  2. Wah !!!! bahut sundar rachna....chidiya ke maadhyam se gahan seekh.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह ...कितने सरल शब्दों में जीवन की इतनी बड़ी बात कहें दी हैं आपने डॉ ...वाह बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं