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मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

सत्य -असत्य


तुम मुझसे
सत्य सुनना चाहते
मेरा सत्य जानना चाहते
पर अपना सत्य
बताना नहीं चाहते
असत्य के आवरण में
अपना सत्य छुपाना चाहते
सत्य की अपेक्षा करना
अगर आवश्यक है
तो तुम्ही बताओ
सामने वाला भी अगर
सत्य की अपेक्षा रखता है
तो गलत कहाँ करता है?
फिर सत्य जानने के लिए
हम क्यों
इतना लालायित रहते ?
तुम कहोगे
मानव स्वभाव है
तो फिर मानव स्वभाव तो
असत्य को सहना भी नहीं है
चाँद को
सूरज तो नहीं कह सकते
मेरे पास तो
उत्तर का अभाव है
तुम्हारे पास
उत्तर का समाधान हो तो
मुझे ही नहीं
सारे जग को बताओ
नहीं तो सत्य की अपेक्षा
करना छोड़ दो
वह भी नहीं हो पाए तो
असत्य को सुनते रहो 
असत्य बोलते रहो 
परमात्मा को पाना है तो
सत्य कहने का
प्रयत्न करना प्रारम्भ करो
इस व्याधि से मुक्ती
मिल जायेगी 
परमात्मा की इच्छा
अनुरूप जी सकोगे
अभी जो भी हम कर रहे हैं
वो हमें परमात्मा से
दूर कर रहा है
03-03-2012
283-18-03-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढि़या
    कल 04/04/2012 को आपके ब्‍लॉग की प्रथम पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    ... अच्छे लोग मेरा पीछा करते हैं .... ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. इश्वर सत्य है ... सत्य ही शिव है ... शिव ही सुंदर है ... :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. असत्य को सुनते रहो
    असत्य बोलते रहो
    परमात्मा को पाना है तो
    सत्य कहने का
    प्रयत्न करना प्रारम्भ करो

    bahut sahi...
    sundar rachna....!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सत्य-असत्य .....आत्मा -परमात्मा....जीवन की उहापोह का सुंदर चित्रण I

    उत्तर देंहटाएं