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सोमवार, 30 अप्रैल 2012

हास्य कविता-बुखार का इलाज कर दो ,जुखाम को भाड़ में जाने दो


हास्य कविता-बुखार का इलाज कर दो ,जुखाम को भाड़ में जाने दो
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जुखाम बुखार से पीड़ित
हँसमुखजी सीधे पहुंचे
डाक्टर के पास
कहने लगे बुखार का
इलाज कर दो
जुखाम को यूँ ही छोड़ दो
डाक्टर चकराया
फ़ौरन बोला कारण बताओ
हँसमुखजी बोले
पहले भी हुआ था जुखाम
खाई थी गोली,
हुआ रिएक्शन
मुंह में हो गए छाले
छालों की दवा खाई
उसने भी किया रिएक्शन
याददाश्त चली गयी
फिर गज़ब हो गया
पत्नी को समझा मुन्नीबाई
पांच सौ का नोट थमा कर
नाचने को कह दिया
पत्नी फुफकारी
गर्दन से पकड़ कर चौराहे
पर लायी
करी ज़बरदस्त धुनायी
इज्ज़त की हाय हाय हो गयी
पिटता तो पहले भी रोज़ था
पर सरे बाज़ार इज्ज़त का
फलूदा नहीं बनता था
आप तो 
बुखार का इलाज कर दो
जुखाम को भाड़ में जाने दो

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-03-2012
343-77-03-12

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