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रविवार, 15 अप्रैल 2012

उनसे ज्यादा हम परेशाँ हैं


कोई बता दे
वो परेशाँ क्यूं हैं ?
कौन सा गम उन्हें
रुलाता है ?
उनके चेहरे का नूर
छुपाता है
हम यूँ ही वजह
जानना नहीं चाहते
उनकी परेशानी से
हम भी बेहाल है
जब उन्हें सुकून नहीं
हमें सुकून कैसे होगा
उनसे ज्यादा हम
परेशाँ हैं
06-03-2012
308-42-03-12

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