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रविवार, 29 अप्रैल 2012

लोग पूंछते मुझसे,होली क्यों नहीं खेली?


लोग पूंछते मुझसे
होली क्यों नहीं खेली?
मैं कहता हूँ
तुम्ही बताओ
कैसे मैं होली खेलूँ?
कैसे दीपावली मनाऊँ?
कोई समझाए मुझे
जब गरीब के सर पर
छत नहीं
भूखे को रोटी नहीं
ईमान की कोई कद्र नहीं
बड़ों को सम्मान नहीं
नारी अब सुरक्षित नहीं
मिठाई दूध सब नकली
मिलता
भाई को भाई दुश्मन
लगता
जब मनों में प्यार नहीं
कैसे कोई त्योंहार मनाऊँ?
क्या होली
क्या दीपावली मनाऊँ
10-03-2012
339-73-03-12

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