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शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

नन्ही चिड़िया ने पंख फैलाए


नन्ही चिड़िया ने 
पंख फैलाए
उमंग उत्साह से 
उड़ चली  
आकाश नापने
पहुँच गयी ऊंचे पर्वत
के पास
बार बार प्रयत्न किया 
पार ना कर सकी पर्वत को
थक हार मुंह लटका कर
लौट आयी माँ के पास
हार से व्यथित
माँ से शिकायत करने लगी 
क्यों नहीं सिखाया उसने 
पर्वत को पार करने
का राज़
माँ मुस्कारा कर बोली
सब्र और संयम रखो
एक दिन
पर्वत भी पार करोगी
थोड़ी शक्ति और संजो लो
ठीक से उड़ना सीख लो
फिर पर्वत को पार करो
सफलता
कदम अवश्य चूमेगी
पर्वत को पार करने की
इच्छा एक दिन
अवश्य पूरी होगी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर...
10-03-2012
335-69-03-12

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