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रविवार, 22 अप्रैल 2012

इतना सा बता दो(हास्य कविता)



कैसे हमें देख लें ?
ह्रदय की बात सुन लें
पत्नी उन्हें बना लें
इतना सा बता दो
रूठ जाएँ तो
कैसे उन्हें मनाएं ?
इतना सा बता दो
क्रोध में
आग बबूला हो जाएँ
कैसे उन्हें ठंडा करें ?
इतना सा बता दो
चुप हो जाएँ
एक शब्द भी ना बोलें
कैसे बुलवाएँ ?
इतना सा बता दो
किसी से
हँस कर बात कर लें
वोउसे सौत समझ लें
कैसे उन्हें समझाएँ ?
इतना सा बता दो
चलो नारियों से ही
पूंछ लें
पत्नी को कैसे खुश
रखा जाए ? 
इतना सा बता दो
08-03-2012
324-58-03-12
(अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता)

1 टिप्पणी:

  1. इस विषय में कोई विशेषज्ञ नहीं, बस भाग्य का सहारा है।

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