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सोमवार, 16 अप्रैल 2012

परेशाँ नहीं हूँ दिल के टूटने से


परेशाँ नहीं हूँ
दिल के टूटने से
परेशाँ हूँ
सिर्फ एक बात से
क्यूं एक ही
दिल दिया खुदा ने
गर दे देता ढेर सारे
दिल मुझे
उनके हुस्न के खातिर
दिल को बार बार
टूटने देता
ज़िन्दगी के आख़िरी
लम्हे तक
उन्हें चाहना ना
छोड़ता
06-03-2012
309-43-03-12

6 टिप्‍पणियां:

  1. एक ही दिल ने इस कदर परेशां कर रखा है...................
    ढेरों होते तो क़यामत आ जाती....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut khub kya bat kahi apane.............

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिल जो दो चार होता
    एहसास एहसास नहीं अखबार होता

    उत्तर देंहटाएं