ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 8 अप्रैल 2012

मजबूरी में उसका हाथ थाम लिया


मुझ पर तोहमत
ना लगाओ
मैंने तो नहीं चाहा
उसकी तमन्ना बनूँ
मैंने तो सिर्फ चाहा था
वो तन्हा ना रहे
तन्हाई में अश्क ना
बहाए
रो रो कर झील सी
नीली आँखों की
ख़ूबसूरती ना खो दे
मैंने तो चाहा तो
वो मायूस ना रहे
मायूसी में
जिंदा रहने की ख्वाइश
ना छोड़  दे
मैं कद्रदां हूँ खूबसूरत
चेहरों का
आशिक हूँ नशीली
आँखों का
कैसे ये सब बर्दाश्त
करता
मजबूरी में उसका
हाथ थाम लिया
05-03-2012
294-29-03-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर वाह!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 09-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं